
राघव चड्ढा ने बताई असली बात, जिस अमेरिका के पक्ष में भारत संसद में बोलता था, आज उसने बता दिया कि अमेरिका किसी का नहीं है
अमेरिका का नया टैरिफ: क्या है पूरा मामला?
पहले से लागू 25% टैक्स के साथ अब कुल शुल्क 50% हो गया है।अमेरिका ने अगस्त 2025 में भारत से आयात होने वाले कई उत्पादों पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की है।
इसका मुख्या कारण है अमेरिका के अनुसार भारत का रूस से सस्ते तेल का आयात करना है, जिसे वह युद्ध को indirect समर्थन मान रहा है।
किन भारतीय उत्पादों पर पड़ेगा असर?

इस टैरिफ का असर खासतौर पर इन सेक्टरों पर पड़ेगा:
- टेक्सटाइल और परिधान
- ज्वेलरी और हीरे
- फार्मा प्रोडक्ट्स
- आईटी हार्डवेयर और इलेक्ट्रॉनिक्स
भारतीय अर्थव्यवस्था और आम लोगों पर प्रभाव
- MSME सेक्टर पर दबाव: लगभग 55% निर्यात प्रभावित हो सकता है, खासकर छोटे और मध्यम व्यवसाय।
- कीमतों में बढ़ोतरी: अमेरिका में भारतीय सामान महंगा होने से मांग घटेगी, जिससे उत्पादन और रोजगार पर असर पड़ेगा।
- किसानों पर असर: कृषि उत्पादों का निर्यात घटने से किसानों की आय पर दबाव बढ़ सकता है।
भारत की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि वे किसानों और देशहित से जुड़ी नीतियों पर कोई समझौता नहीं करेंगे, भले ही इसके लिए “भारी कीमत चुकानी पड़े”।
वहीं, किसान संगठनों ने इसे भारत की आर्थिक संप्रभुता पर हमला बताया है और विरोध की घोषणा की है।
आगे का रास्ता: भारत को क्या करना चाहिए?
- नए बाजारों की तलाश: यूरोप, अफ्रीका और एशिया में निर्यात बढ़ाना।
- घरेलू उत्पादन को बढ़ावा: लागत घटाकर और गुणवत्ता सुधारकर वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे रहना।
- कूटनीतिक प्रयास: अमेरिका के साथ बातचीत कर टैरिफ में राहत की कोशिश।
अमेरिका का यह नया टैरिफ सिर्फ एक व्यापारिक निर्णय नहीं, बल्कि यह भारत की आर्थिक नीतियों, कूटनीति और आम जनता के जीवन को सीधे प्रभावित करने वाला कदम है।
इस समय भारत के लिए ज़रूरी है कि वह संयम, रणनीति और नवाचार के साथ इस चुनौती का सामना करे।