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ऐसा कोई सगा नहीं जिसको डॉनल्ड ट्रंप ने ठगा नहीं। हां मतलब पहले एलॉन मस्क जिन्होंने इलेक्शन जिताया और फिर वो भारतीय जिन्होंने हवन पूजन, चिंतन, मंथन और डॉन्ड ट्रंप डोनल्ड ट्रंप किया था। लेकिन कमाल की कहानी है। सियासत में कब, क्या कहां कैसे हो जाए कुछ पता नहीं चलता। तभी तो एक वक्त था जब अमेरिका में हाऊडी मोदी हो रहा था। अमेरिकनंस मोदी मोदी मोदी कर रहे थे और भारत में नमस्ते ट्रंप चल रहा था। भारत और अमेरिका दोनों की दोस्ती की मिसाल दी जा रही यह माना जा रहा था कि हम बेस्ट फ्रेंड्स बन रहे हैं। डॉन्ड ट्रंप मोदी साहब को टफ नेगोशिएटर कह रहे

थे। दोनों मुस्कुराते थे। वो भी तस्वीर हमने देखी जहां पर मोदी साहब बैठ रहे हैं तो डॉनल्ड ट्रंप कुर्सी पीछे खींच रहे हैं और पीछे मुस्कुरा रहे हैं जब तक मोदी साहब लिख रहे हैं। लेकिन फिर वक्त बदला, जज्बात बदले, हालात बदले और यह पता लगा कि सियासत में कभी कोई किसी का सच्चा दोस्त नहीं होता। सिर्फ नफा नुकसान होता है। डॉनल्ड ट्रंप जो शायद नोबेल प्राइज पाना चाहते थे। लेकिन जब भारत ने उन्हें क्रेडिट नहीं दिया तो ट्रंप ने नमस्ते भारत की जगह भारत को 25% का टैक्स दिया। यह आरोप लगा कर दिया कि आप रूस के साथ रिश्ते रखते हैं।

ईरान के साथ रिश्ते रखते हैं। भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर अपमानजनक टिप्पणी कर दी। ये कहा कि भारत और रूस की इकॉनमी मरी हुई है। आपस में देखिए। मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। मैं पाकिस्तान में तेल खोजूंगा और हो सकता है कि एक दिन पाकिस्तान का तेल भारत को खरीदना पड़े। पाकिस्तानी मुस्कुरा रहे हैं। लेकिन दुनिया जान रही है कि यह ट्रंप भारत पर दबाव बना रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सब कुछ अचानक हुआ? क्या यह महज इत्तेफाक है कि जिस दिन इंडिया की पार्लियामेंट में ऑपरेशन सिंदूर में डोनल्ड ट्रंप को क्रेडिट नहीं दिया गया।

उसी दिन भारत पर टेरिफ और पेनाल्टी का फरमान लग गया? क्या डॉन्ड ट्रंप ये दिखाना चाहते हैं कि भारत की तरक्की, उनकी मर्जी और मौजूदगी से जुड़ी है? क्या भारत का क्रेडिट ना देना? डॉन्ड ट्रंप की ईर्ष्या की वजह बन गया। क्या यह सारी दोस्ती केवल चुनाव तक की थी? डॉन्ड ट्रंप ने जो टैक्स लगाया है, उसका असर इंडियंस पर कैसे पड़ेगा? क्या भारत को नुकसान होगा? भारत का पैसा कमजोर होगा। भारत में नौकरियों की समस्या आएगी। क्या होगा? क्या भारत अमेरिका के दबाव से निकलकर नई पॉलिसी, नई सहयोगी, नई रणनीति बनाएगा? क्या करेगी?

आपको बताएंगे कि 25% टेरिफ जो डॉन्ड ट्रंप ने भारत पर लगाया है उसका आपकी जेब पर कितना असर पड़ेगा। तो टेरिफ क्या होता है? सबसे पहले आप यह जान लीजिए। टेरिफ दरअसल एक तरह का सीमा शुल्क या टैक्स है जो कोई देश विदेशी सामान पर लगाता है। उदाहरण के तौर पर भारत का मान लीजिए कोई डायमंड है वो अमेरिका में ₹1 लाख में बिक रहा है। अब जब डॉन्ड ट्रंप ने 25% टेरिफ लगा दिया है तो उसकी कीमत जो है वो 12.5 लाख हो जाएगी। इसका नतीजा यह होगा कि अमेरिका में जो ग्राहक हैं वो कम डायमंड खरीदेंगे भारत का। भारत

का निर्यात घटेगा और इसका सीधा असर हमारी अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। तो लाजमी बात है। अब ₹5 लाख बढ़े हैं तो हो सकता है वो डायमंड किसी और देश में खरीद ले। लेकिन सवाल यह है कि जो 25% टेरिफ लगाया गया है इसकी मार किन-किन सेक्टर में पड़ने वाली है भारत के? तो आपको बताते हैं। सबसे ज्यादा असर जो पड़ेगा वो टेक्सटाइल सेक्टर पड़ेगा। हर साल भारत 15 अरब डॉलर का निर्यात करता है। ट्रैफिक के चलते मांग जो है वो 20 से 30% गिर सकती है और उसका सीधा असर यह होगा कि लोगों की नौकरियां खतरे में पड़ जाए। दूसरा भारत के फार्मा सेक्टर

पर असर पड़ेगा। भारत अमेरिका को $ अरब डॉलर की जेरिक दवाइयां भेजता है। अब अगर अमेरिका इन्हें महंगे दाम पर खरीदेगा तो लाजमी है कि ऑर्डर घटेगा। कंपनियों को घाटा होगा। तीसरा रत्न आभूषण सेक्टर जो 9 अरब डॉलर का है इससे भी झटका लेगा। महंगे दाम से विदेशी ग्राहक जो है दूर भागेंगे और भारत की चमक अमेरिका में कम से कम फीकी पड़ जाएगी। ऑटो पार्ट्स और रसायन सेक्टर में असर पड़ेगा। अमेरिका से मिलने वाले ऑर्डर कम हो जाएंगे जिससे उत्पादन और रोजगार दोनों घटेंगे। इसके अलावा कृषि क्षेत्र वहां भी समस्या आएगी। भारत अमेरिका को हर साल चावल, झीगा, शहद जैसे

तमाम उत्पाद भेजता है। जिनकी मांग घटने से किसानों की आमदनी पर भी चोट पड़ेगा। अब अगर बात आम आदमी की जाए हिंदुस्तान के अंदर तो आपकी जेब पर भी साहब असर पड़ेगा। ट्रंप साहब के फैसले से। टेरिफ के चलते जब भारत का एक्सपोर्ट गिरेगा तो लाजमी है कि रुपए की कीमत डॉलर के मुकाबले घट जाएगी। जब रुपया कमजोर होगा तो पेट्रोल और डीजल जैसे आयातित सामान जो है वो महंगे होंगे। हो सकता है कि पेट्रोल 5 से ₹1 लीटर महंगा हो जाए और इसका सीधा असर जो है वो आपके मोबाइल, गाड़ियां, किराने या सब्जियों पर भी पड़ेगा क्योंकि ट्रांसपोर्टेशन पर

सीधा-सीधा असर पेट्रोल डीजल का होता है। दूसरा बड़ा असर जो है वो नौकरियों पर जाएगा। जैसा कि हमने पहले ही बताया टेक्सटाइल, फार्मा, ऑटो सेक्टर में काम करने वाले लाखों लोगों की नौकरियों पर असर आएगा। अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा। एक अनुमान जो निकल कर आ रहा है वो ये है कि 61000 से 72000 करोड़ का नुकसान होगा तो जीडीपी में भी 0 सम परसेंटेज 567%ेज लगभग 30 अरब डॉलर की गिरावट जो है दर्ज की जा सकती है। अब 25% टेरिफ जो है वो सिर्फ एक टैक्स नहीं है। यह भारत की कमाई, रोजगार, किसानों और आपकी जेब पर चोट करने वाला भार है। अगर ऐसे फैसले बढ़े तो

महंगाई बढ़ेगी, बेरोजगारी बढ़ेगी। देश की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ेगी। हालांकि कई लोगों का मानना है कि डॉन्ड ट्रंप ने यह भारत को परेशान करने के लिए किया है। अभी अमेरिकनंस आने वाले हैं। टेबल पर बातचीत हो उससे पहले ट्रंप जो है वो चाहते हैं कि भारत पर दबाव पड़े। भारत झुकने जाए। हालांकि इन सबके बीच में एक बात जो ये स्पष्ट होती है वो ये कि अमेरिका भरोसे लायक नहीं है। ऐसा कोई सगा नहीं जिसको ठगा नहीं। आप याद कीजिए जिसने ओसामा बिन लादेन को बनाया यही अमेरिका था। सद्दाम हुसैन को बनाया। यही अमेरिका था। कभी किसी को आबाद

करता है और जिसको आबाद करता है बाद में उसको बर्बाद करता है। 1965 और 1971 के युद्ध हम भूले नहीं। पाकिस्तान भारत पर हमला कर रहा था। अमेरिका साथ में खड़ा था। 1971 में तो अमेरिका ने हद पार कर दी थी। अपने सातवें बेड़े को बंगाल की खाड़ी तक भेजा था ताकि भारत डर जाए। लेकिन भारत अब डरा नहीं था और बांग्लादेश को आजाद करवाया था और ये बताया था कि हम दबने झुकने डरने वाले नहीं हैं। इनफैक्ट 1998 में जब भारत ने परमाणु परीक्षण किया था तब अमेरिका ने एक बार फिर दोस्ती की जगह पाबंदियां थोप दी थी। तब भी भारत ने हार नहीं मानी थी।

रशिया ने तब भारत का साथ दिया था और भारत ने दुनिया को जवाब दिया था। अब 2025 में जब हम ये मान रहे थे कि अमेरिका इंडिया के रिश्ते बेहतर हैं तब ट्रंप वही पुराना खेल खेल रहे हैं। रूस से तेल और हथियार खरीदने पर भारत को पेनल्टी की धमकी दे रहे हैं। हालांकि सच ये है कि रूस ने हमेशा भारत का साथ दिया और भारत अपने सबसे भरोसेमंद दोस्त को किसी डर के मारे छोड़ेगा ऐसा लगता नहीं है। वैसे भी ट्रंप जो है वो दोगले इंसान है। ट्रंप का दोगलापन दुनिया देख रही है। डॉनल्ड ट्रंप को दरअसल दोगलापन हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि उनकी धमकी ड्रामा

दोहरे मापदंड वाली है। डॉन्ड ट्रंप ने कहा कि भारत हमारा दोस्त है लेकिन उसके टेरिफ ज्यादा है। वो रूस से हथियार और तेल खरीदता है जो यूक्रेन युद्ध को रोकने की हमारी कोशिशों के खिलाफ है। इसीलिए भारत पर हम एक अगस्त से 25% टेरिफ और पेनाल्टी लगाएंगे। लेकिन डॉन्ड ट्रंप की इस धमकी में भी कई झोल है। सबसे पहले भारत की अर्थव्यवस्था को मरी हुई कहते हैं। जबकि हकीकत यह है कि भारत की जीडीपी 2025 में 4.3 ट्रिलियन डॉलर को छूने वाली है। देश में हमारे लाखों स्टार्टअप है। 100 से ज्यादा यूनिकॉर्न है। कमजोर देश की पहचान

तो नहीं हो सकती है भारत में। रही बात रूस से संबंध की तो डोनाल्ड ट्रंप जो भारत को नैतिकता का पाठ पढ़ा रहे हैं उनका दोगलापना भी समझिए कि रूस से अमेरिका भी ट्रेड कर रहा है। अरबों डॉलर का ट्रेड कर रहा है और उसमें तेल और यूरेनियम शामिल है। तो अमेरिका अपने लिए तो व्यापार मुनाफा देख रहा है लेकिन वही मुनाफा जब भारत का हो रहा है तो उसे वो गुनाह नजर आ रहा है। और इसीलिए हम कह रहे हैं कि ट्रंप चाचा जो हैं वो एक नंबर के दोगले इंसान हैं। खैर भारत क्या कर सकता है? सवाल ये आना चाहिए। उनकी जो कहानी है वो तो कर चुके हैं। भारत क्या कर सकता है?

डॉनल्ड ट्रंप के 25% टेरिफ लगाने के बाद भारत के पास भी स्ट्रेट वॉर में जीतने के लिए कई चाल है। मसलन पहली जवाबी टेरिफ दे दनादन कैसे बताते हैं। दरअसल अमेरिका ने इस बीच में कई देशों पर टेरिफ लगाया। कनाडा पर लगाया था। कनाडा ने पलटवार किया। करीब $20 अरब डॉलर के अमेरिकी सामान पर उसने भी टेरेफ ठोक दी। मेक्सिको ने भी ऐसा किया। ब्राजील ने तो साफ-साफ कह दिया कि अगर अमेरिका उनके एलुमिनियम या स्टील पर टैरे बढ़ाएगा तो उसी भाषा में जवाब दिया जाएगा। सवाल यह है कि भारत को पीछे क्यों रहना चाहिए? भारत को भी अमेरिका अह बादाम,

अखरोट, सेब, दाल पर टैरे बढ़ाना चाहिए। हालांकि, इसमें एक समस्या यह है कि इससे ये चीजें देश में भी महंगी हो जाएंगी और इसका असर हमारी आपकी जेब पर पड़ेगा क्योंकि जो सामान वहां से आ रहा है उसे हम खरीदते हैं तो टेररिफ बढ़ेगा तो वो हमें महंगी पड़ेंगी। दूसरा ऑप्शन ये है कि ट्रेड डील बातचीत का रास्ता निकाला जाए। दरअसल 25 अगस्त को अमेरिका से एक बड़ा दल भारत आ रहा है। उम्मीद की जा रही है कि सितंबर अक्टूबर तक भारत अमेरिका की ट्रेड डील का पहला राउंड पूरा हो सकता है। भारत ने कई रियायतें पहले से दी है। जैसे अमेरिका की हार्ले डेविडसन बाइक पर टैक्स

घटाया गया। शराब पर टैक्स कम किया गया है। लेकिन खेती और दूध जैसे मुद्दों पर शायद भारत नहीं झुकेगा। एक्सपर्ट्स भी ये बात कह रहे हैं कि डोनाल्ड ट्रंप की फितरत है। वो पहले धमकाते हैं फिर नरम हो जाते हैं। हो सकता है कि आखिर में टैक्सेस 10-15% रह जाए। लेकिन इन सबके बीच में जो हमने शुरुआत में कहा कि आप ट्रंप या अमेरिका पर भरोसा नहीं कर सकते। अमेरिका भारत का यह सच है सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। लेकिन भारत को अब आगे देखना होगा। भारत को यूरोपीय संघ, खाड़ी देशों और आसियान देशों के साथ संबंध और बढ़ाने होंगे। भारत ने हाल ही में

ब्रिटेन के साथ एक व्यापार समझौता किया। वियतनाम, जापान और इंडोनेशिया जैसे देशों के साथ समझौते किए। इन बाजारों में भारतीय सामानों की मांग बढ़ाकर अमेरिकी टेरेफ के असर को कम किया जा सकता है। इसके अलावा अपने घर को मजबूत करना होगा क्योंकि अगर बाहर से कोई झटका आता है तो सबसे पहले घर मजबूत होना जरूरी है। सरकार को निर्यात करने वालों को टैक्स छूट, सब्सिडी और सस्ते लोन देकर उनका हौसला बढ़ाना होगा ताकि वह दुनिया से मुकाबला कर सके। रुपया मजबूत रखना जरूरी है जिससे डॉलर के मुकाबले हमारी ताकत कम ना हो। और सबसे

बड़ी बात मेक इन इंडिया को और ज्यादा मजबूत करना ताकि हम बाहर से चीजें कम मंगवाएं और देश भी ज्यादा बनाएं। यही असली मजबूती की पहचान है। इसके अलावा कूटनीतिक फैसले करने होंगे। भारत हमेशा से अपने फैसले खुद करता आया है। इस बार भी कॉमर्स इंडस्ट्री ने कहा है कि हम अपने नेशनल इंटरेस्ट की हर हाल में रक्षा करेंगे। डॉन्ड ट्रंप चाहे जितनी धमकियां दे रहे हो। भारत ये जानता है कि अमेरिका में भी लाखों लोग ऐसे हैं जो भारत के हैं। भारतीय टेक और बिजनेस की धमक वहां पर भी है और इनकी आवाज को अमेरिका की सरकार पूरी तरह नजरअंदाज नहीं कर सकती। वहीं चीन के बढ़ते

वो जो करेगी करेगी। लेकिन क्या हम और आप भी तैयार हैं? देश के लिए छोटा लेकिन एक बड़ा कदम उठाने के लिए, भारत को प्रायोरिटी देने के लिए, भारतीय सामानों को प्रायोरिटी देने के लिए। लेट्स सी हाउ इट गोस। आप क्या सोचते हैं? क्या डोनाल्ड ट्रंप भारत को परेशान कर पाएंगे? हालांकि एक्सपर्ट्स अभी भी जो हमने सुना पढ़ा जाना वो यही कह रहे हैं कि ट्रंप साहब धीरे-धीरे नॉर्मल हो जाएंगे। होश में आ जाएंगे और शायद टेरिफ कम कर जाएंगे। लेकिन भारत क्या फिर से ट्रंप पर भरोसा करेगा?|

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