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“Ek Deewane Ki Deewaniyat – पहली दिन की कमाई, कहानी, समीक्षा और बॉक्‍स ऑफिस भारी Collection”


1.🎬 परिचय

Ek Deewane Ki Deewaniyat 2025 में रिलीज़ हुआ एक हिंदी-भाषी रोमांटिक ड्रामा फिल्म है, जिसे Milap Milan Zaveri द्वारा निर्देशित किया गया है। मुख्य भूमिका में हैं Harshvardhan Rane और Sonam Bajwa। 

यह फिल्म 21 अक्टूबर 2025 को दिवाली के अवसर पर रिलीज़ हुई।

2.📖 कहानी की रूप-रेखा

फिल्म की कहानी है एक युवा राजनीतिज्ञ Vikram Aditya Bhosle (Harshvardhan Rane) की, जिसे मिलती है फिल्म-स्टार Adaa Randhawa (Sonam Bajwa)। शुरुआत में यह प्यार की कहानी लगती है, लेकिन धीरे-धीरे यह जुनून में बदल जाती है — जहाँ प्यार के पीछे अंधाधुंध चाहत, ओब्सेशन और ईर्ष्या का तड़का लग जाता है। 

यह विषय बेहद पुरानी शैली के रोमांस-ड्रामा की तरह है जहाँ “मेरी हो जाओ या मैं पागल हो जाऊँ” टाइप का — भाव प्रमुख है। कई समीक्षकों ने इस पहलू को रेट्रो कहा है। 

3.📊 बॉक्स ऑफिस – पहला दिन

फिल्म ने पहले दिन (21 अक्टूबर 2025) में लगभग ₹ 8.50 करोड़ की कमाई की। The Times of India+2Navbharat Times+2 इस दौरान हिंदी संस्करण में ऑक्यूपेंसी करीब 39.51 % रही।

खास बातें:

4.🎥 समीक्षा एवं प्रतिक्रिया

प्रो:

कॉन्:

“The film does nothing but prop a flagrant red-flag as a ‘hero’, forcing the ‘heroine’ to put out a preposterous proposal half way through the film…”

तो कुल मिलाकर, यदि आप भावनात्मक और मसालेदार रोमांस-ड्रामा के शौकीन हैं, तो मनोरंजन मिल सकता है। लेकिन अगर आप नए-ताज़ा सिनेमा चाह रहे हैं, तो शायद यह फिल्म बहुत गहराई तक नहीं जाएगी।

5.🔍 OTT एवं आगे की बातें

✅ क्यों देखें?

❌ किन बातों से सतर्क रहें?

🌟 निष्कर्ष

“Ek Deewane Ki Deewaniyat” एक उत्साही रोमांस-ड्रामा है जिसमें प्यार, जुनून और ओब्सेशन तीनों मिलते हैं। प्रथम दिन की कमाई कुछ अच्छे संकेत देती है, लेकिन आलोचनाओं ने इसे “मजबूत फिल्म” नहीं माना है। यदि आप हल्के मनोरंजन के मूड में हैं और बड़े संदेश या गहरा अर्थ नहीँ तलाश रहे हैं — तो यह फिल्म आपके लिए हो सकती है। नहीं तो, आप OTT रिलीज़ का इंतज़ार भी कर सकते हैं।

🌸 पहली नज़र का प्यार

वो लाइब्रेरी का कोना था, जहां राहुल ने सिया को पहली बार देखा। हवा में किताबों की खुशबू थी, और सिया की मुस्कान ने उसे पलक झपकने नहीं दिया।
उसने सोचा —

“अगर इश्क किसी एक पल में होता है, तो शायद वो पल यही था।”

वो सिया से बात करने की हिम्मत नहीं जुटा पाया, पर उसका दिल रोज़ उसी लाइब्रेरी में खींचा चला जाता। कभी किताब लेने के बहाने, कभी सीट ढूंढने के बहाने — लेकिन सच्चाई ये थी कि अब राहुल सिर्फ सिया के लिए जी रहा था।


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