परिवारिक शोषण की सच्चाई दोस्तों आज की कहानी सिर्फ एक क्राइम स्टोरी नहीं है।
शोषण की सच्चाई यह जज्बात है। यह दर्द है उस लड़की के जिसके साथ यह सब कुछ हुआ। और ट्रस्ट मी गाइस ऐसी स्टोरी दुनिया के अंदर आपने कहीं भी नहीं सुनी होगी। जिसके बीच वो फैमिली उस लड़की के साथ क्या-क्या करती है, वह सुनने के बाद आपके पैरों तले जमीन फिसल जाएगी और आप सोचने पर मजबूर हो जाओगे कि क्या घर की इज्जत किसी की जान से भी ज्यादा जरूरी हो सकती है। तो आइए जानते हैं यह सब कुछ …
परिवारिक शोषण की कहानी यहाँ से शुरू होती है...
26 जनवरी 2006 एक लड़का लंदन के पुलिस स्टेशन के अंदर घुसता है जिसका नाम था रमत सुलेमानी। वह पुलिस को जाकर बताता है कि उसकी गर्लफ्रेंड बहुत दिनों से गायब हो चुकी है। मैं आपकी हेल्प चाहता हूं प्लीज मेरी रिपोर्ट दर्ज करें और जल्द से जल्द उसका पता लगाया जाए। उसने बताया कि कई हफ्ते हो चुके हैं जब से उसकी गर्लफ्रेंड ने ना कोई मैसेज और ना ही कोई फोन कॉल की है। लेकिन पुलिस इस लड़के की बात को सीरियस नहीं लेती क्योंकि इस लड़के का बेनाज़ नाम की लड़की के साथ कोई भी ब्लड रिलेशन नहीं था। तो पुलिस यह केस दर्ज करने से मना कर देती है। लेकिन यह लड़का हार नहीं मानता। यह उसका बॉयफ्रेंड था। यह बार-बार पुलिस के पास पहुंचता है। पुलिस स्टेशन जाकर उनको कहता है कि प्लीज मेरी गर्लफ्रेंड को ढूंढिए। जितने टाइम से मेरी बात नहीं हुई, हो सकता है उसके साथ कोई गलत चीज ना हो गई हो। लगभग कई हफ्तों तक यह हार नहीं मानता और पुलिस स्टेशन जाता रहता है। जिसके बाद आखिरकार पुलिस को इसकी बात सुननी पड़ी और पुलिस इन्वेस्टिगेशन शुरू करती है जिसके बीच बहुत बड़े-बड़े पत्ते खुले और यह पत्ते भी ऐसे थे

जिसके अंदर एक ऐसी परिवारिक शोषण की सच्ची घटना सामने आई जो कि आग को हिला देने वाली है।
दरअसल बनानाज़ नाम की इस लड़की का जन्म इराक में होता है और इसकी इराकी कुर्दिश फैमिली बहुत ही ज्यादा स्ट्रिक्ट थी और उनकी फैमिली के लिए लड़की तो सिर्फ घर की इज्जत का सिंबल थी। 1995 में यह फैमिली यूके शिफ्ट हो जाती है। लेकिन शिफ्ट तो यूके हो गए। पर इनकी सोच वही पुरानी पुराने ख्याल और पुराने ही तौर तरीके और इसी सोच के चलते 17 साल की बिना की शादी उसकी मर्जी के बिना एक 27 साल के आदमी से कर दी जाती है। जो ना ही इंग्लिश बोलता था और ना ही ज्यादा पढ़ा लिखा था। और अब सारा मामला यहीं से शुरू होता है जब वह लड़की की एक नहीं सुनते और 17 साल की लड़की की शादी कर देते हैं वह भी एक ऐसे इंसान के साथ जो उससे 10 साल बड़ा था और उसके साथ जिंदगी बतानी बिनाज़ के लिए किसी कैद से कम नहीं थी और इस शादी से पहले बिनाज़ सिर्फ तीन बार उस लड़के को मिली थी और यह शादी बिनाज़ के लिए किसी जेल से कम नहीं थी क्योंकि हर रोज उसे पीटा जाता उसके साथ काम होते और जब वो वहां से भागकर अपनी फैमिली के पास पास वापस आ जाती तो उसके फादर एक बात भी उसकी नहीं सुनते और वापस उसे उसी घर भेज देते जहां पर उसकी शादी की थी। पर पूरे 2 साल बाद बिनाज़ हिम्मत करती है और इस लड़के को छोड़ देती है। बाद बिनाज़ की जिंदगी में एक लड़का आता है जिसका नाम था रमत एक ऐसा लड़का जो कि बिनाज़ अपनी पूरी जिंदगी में चाहती थी। यह एक ऐसा इंसान था जिसके साथ बनाज़ अपनी बची हुई जिंदगी पूरे अच्छे तरीके से बिता सकती थी। जिसके बाद इन दोनों का रिलेशन शुरू हो जाता है। फिर इन दोनों ने छुप-छुप कर मिलना शुरू कर दिया। फोन पर बात होती और धीरे-धीरे प्यार इतना गहरा होता गया कि दोनों लोग शादी की बातें करने लगे थे। बातोंबातों में दोनों ने अपने बच्चों के नाम तक सोच लिए थे। पर बनाज़ यह चीज भूल चुकी थी कि उसका परिवार तो प्यार को गुनाह मानता है। अक्टूबर 2005 बेनाज़ ने महसूस किया तो उसे लगता है कई लोग उसका पीछा कर रहे हैं। बार-बार उसे घूरे जा रहे थे और ध्यान से देखने पर उस लड़की को पता चला कि यह तो उसी की फैमिली के कुछ रिलेटिव हैं जो कि बार-बार उनके घर भी आते रहे थे। यह चीज होते ही 10 अक्टूबर को बेनाज पुलिस स्टेशन जाती है और 2 घंटे की डिटेल्ड स्टेटमेंट देती है। उसी ने पुलिस को बताया कि कैसे बिना पूछे उसकी शादी एक ऐसे इंसान से की गई जिसने उसकी जिंदगी नर्क बना दी। अब जब उसने उसे छोड़ दिया है तो बाद में उसके फैमिली मेंबर ही उसका पीछा कर रहे हैं।

अगर पुलिस ने कोई एक्शन नहीं लिया तो उसकी जान चली जाएगी।
शोषण की वो भी उसी की फैमिली के द्वारा यह सब कुछ किया जाएगा। इतना सब कुछ बताने के बाद भी पुलिस उसकी हेल्प नहीं करती और यह केस ऐसे ही दबा रह जाता है। दिसंबर 2005 बेनाज और उसका बॉयफ्रेंड रहमत दोनों एक जगह पर घूम रहे थे। तभी अचानक उन्हें कोई देख लेता है। यह बात उनकी फैमिली तक पहुंच जाती है। शाम को वह घर वापस लौटी और उसके चाचा बोल रहे थे कि घर की इज्जत के लिए बिनाज़ को काम करना होगा। यह बात बेनाज के कानों तक पहुंच जाती है। वह घर से भागी और पुलिस स्टेशन जाकर फिर से वही चीज बताई कि मेरी फैमिली मुझे नहीं छोड़ेगी। इस बार उसने अपने सारे फैमिली मेंबर्स का नाम भी पुलिस को बता दिया था। पर गेस पुलिस ने आगे से क्या किया? तो गाइस, यह जवाब था कुछ भी नहीं। पुलिस कोई भी एक्शन नहीं लेती। और अब भी बिना को नहीं पता था कि और वह कितने दिनों तक जिंदा रहेगी। 22 जनवरी 2006 विनाश की फैमिली उसको अपने घर पर बुलाती है और उन्होंने यह कहा कि बेटा तुम घर आ जाओ। हम तुम्हारी डिवोर्स की बात करना चाहते हैं और अपने घर जाने से पहले विनाश पुलिस को एक स्टेटमेंट देकर जाती है जिसमें उसने बताया कि उसे डर भी लग रहा है कि घर जाकर उसके साथ कुछ गलत ना हो जाए। लेकिन इसी के बाद भी मां के बार-बार कहने पर वह अपने घर वापस चली जाती है और उस दिन के बाद आज तक बेनाज़ किसी को भी नहीं मिली। फिर उसका बॉयफ्रेंड रमत पुलिस के पास जाता है और
परिवारिक शोषण की इन्वेस्टिगेशन शुरू होती है।

परिवारिक शोषण अब रमत के कहने पर पुलिस जल्द ही उसकी सारी फैमिली को अरेस्ट कर लेती है। अरेस्ट करने के बाद जैसे ही उन्हें जेल में भेजा गया तो उनकी बातें रिकॉर्ड करनी शुरू की गई जिसके अंदर पुलिस को बहुत बड़े-बड़े सबूत पता चले। सारी फैमिली अब जेल के अंदर थी। उसकी मां भी, उसके कजिन, मां-बाप, चाचा सभी लोग अंदर जो बातें कर रहे थे उसी से एक बहुत तगड़ी स्टोरी बाहर आती है। जिससे पता चला कि उन्होंने कैसे अपनी ही बेटी को पहले घर पर मारने की कोशिश की जिसके दौरान वो खिड़की तोड़कर घर से भाग जाती है। लेकिन जब सेकंड टाइम आई, तो किसी ने भी उसे नहीं छोड़ा। सबसे पहले तो उसे बांधा गया। उसके साथ उसके चाचा, कजन, खुद बाप भी मिलकर गंदे काम करते हैं। गंदे काम का मतलब आप लोग समझ चुके होंगे। सब कुछ करने के बाद उसे मारा जाता है। कर एक सूटकेस के अंदर डाला गया और किसी सीक्रेट जगह पर उसे दफना दिया जाता है। जब पुलिस को यह इंफॉर्मेशन मिलती है तो पुलिस बाद में इन सभी के फोन कॉल्स ट्रेस करती है जिसके बीच बर्मिंगम की एक जगह सामने आती है। 28 अप्रैल 2006 को एक फ्रीजर के नीचे मिट्टी खोली गई और वहां पर एक सूटकेस मिला जिसके अंदर थी बिना। उसके पिता, चाचा, कजिन तक को लाइफ सेंटेंस हो जाती है। लेकिन किसी को भी इस सजा की कोई शर्मिंदगीगी नहीं थी। रमत जो बनानाज़ का बॉयफ्रेंड था वो कभी भी इस चीज से बाहर नहीं उभ पाया। आखिरकार 2016 के अंदर वो खुद भी खत्म हो गया और यह एक और जो कि खुद बेनाज़ के लिए चली गई। बेनाज़ सिर्फ एक लड़की नहीं थी। एक ऐसी आवाज थी जिसे पुलिस के द्वारा बार-बार इग्नोर किया गया। अब मेरा तो यही मानना है। अगर पहली बार जब पुलिस को उसने बताया था तो पुलिस उसकी बात मान लेती तो आज बेनाज़ जिंदा होती। पुलिस की गलती के कारण ही यह सब कुछ हुआ। अब आपको क्या लगता है? कमेंट जरूर कर देना। इसी के साथ हमारा सेकंड चैनल जिसके ऊपर आप बहुत ज्यादा प्यार दे रहे हैं एक बार प्लीज उसे चेक करके सब्सक्राइब जरूर कर देना।
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