नवरात्रि
नवरात्रि क्या है?
नवरात्रि हिन्दू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और प्रमुख पर्व है। वर्ष में चार बार नवरात्रि आती है – चैत्र, आषाढ़, आश्विन (शारदीय) और माघ। इनमें से चैत्र और शारदीय नवरात्रि का महत्व सबसे अधिक माना जाता है।
यह त्योहार माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की उपासना का पर्व है, जो शक्ति, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक हैं।
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नवरात्रि 2025 की तारीखें
शारदीय नवरात्र (Navratri Kalash Sthapana Muhurat) के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा का विधान है जो दुर्गा का प्रथम रूप हैं। इस दिन कलश स्थापना का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि इस दिन देवी की पूजा से स्थिरता और शक्ति की प्राप्ति होती है तो आइए इस दिन से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं।jagran.com
नवरात्रि का महत्व
नवरात्रि केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक और स्वास्थ्य की दृष्टि से भी अत्यंत लाभकारी है।
- माँ दुर्गा की पूजा करने से नकारात्मक शक्तियाँ दूर होती हैं।
- व्रत रखने से शरीर का शुद्धिकरण होता है और मन एकाग्र होता है।
- यह समय नए कार्यों की शुरुआत और शुभ संकल्प लेने के लिए श्रेष्ठ माना जाता है।
नवरात्रि पूजा विधि (Navratri Puja Vidhi)
नवरात्रि में पूजा विधि का विशेष महत्व है। सही विधि से पूजा करने पर माँ दुर्गा शीघ्र प्रसन्न होती हैं।
- प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- घर के मंदिर को साफ कर कलश स्थापना करें।
- कलश पर नारियल और आम के पत्ते रखें तथा जल, सुपारी और सिक्का डालें।
- माँ दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर स्थापित कर दीपक जलाएं।
- दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा और आरती का पाठ करें।
- नौ दिनों तक अखंड ज्योति जलाना शुभ माना जाता है।
👉 यह पूजा विधि करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि आती है।
नवरात्रि व्रत नियम (Navratri Vrat Rules in Hindi)
- व्रत रखने वाले व्यक्ति को सात्विक भोजन ही करना चाहिए।
- अनाज, नमक, मांस, प्याज-लहसुन का सेवन वर्जित है।
- फल, दूध, दही, साबूदाना, सिंघाड़ा आटा, कुट्टू का आटा आदि ग्रहण कर सकते हैं।
- सुबह-शाम आरती करना आवश्यक है।
- व्रत के दौरान किसी भी प्रकार का नकारात्मक कार्य जैसे झूठ बोलना, क्रोध करना या गाली देना अशुभ माना जाता है।
नवरात्रि के 9 दिन और 9 देवियाँ
नवरात्रि में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है:
- प्रथम दिन – माँ शैलपुत्री
- द्वितीय दिन – माँ ब्रह्मचारिणी
- तृतीय दिन – माँ चंद्रघंटा
- चतुर्थ दिन – माँ कूष्मांडा
- पंचम दिन – माँ स्कंदमाता
- षष्ठम दिन – माँ कात्यायनी
- सप्तम दिन – माँ कालरात्रि
- अष्टम दिन – माँ महागौरी
- नवम दिन – माँ सिद्धिदात्री
हर देवी की पूजा से अलग-अलग वरदान प्राप्त होते हैं। जैसे माँ शैलपुत्री से साहस, माँ कात्यायनी से सफलता और माँ सिद्धिदात्री से सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं।
नवरात्रि में क्या करें और क्या न करें
✅ करना चाहिए
- घर में शुद्ध वातावरण बनाए रखें।
- प्रतिदिन सुबह-शाम देवी की पूजा और आरती करें।
- माता रानी को लाल चुनरी और फूल अर्पित करें।
- व्रत में सात्विक भोजन ही करें।
❌ नहीं करना चाहिए
- शराब, मांस और तामसिक भोजन का सेवन न करें।
- क्रोध, झगड़ा और नकारात्मक विचारों से दूर रहें।
- व्रत के दौरान बाल और नाखून काटना अशुभ माना जाता है।
निष्कर्ष
नवरात्रि 2025 का पर्व माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर है। सही पूजा विधि, व्रत नियम और श्रद्धा के साथ माँ की आराधना करने से जीवन में सुख-समृद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
इस नवरात्रि माता रानी से प्रार्थना करें कि वे सभी के जीवन में खुशियाँ, स्वास्थ्य और सफलता प्रदान करें।हर देवी की पूजा से अलग-अलग वरदान प्राप्त होते हैं। जैसे माँ शैलपुत्री से साहस, माँ कात्यायनी से सफलता और माँ सिद्धिदात्री से सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं।

