🌅 छठ पूजा क्या है?
छठ पूजा भारत के सबसे प्राचीन और पवित्र त्योहारों में से एक है, जो सूर्य देव (सूर्य भगवान) और छठी माई (उषा देवी) की उपासना के लिए मनाया जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में बड़ी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाता है।
यह पूजा सूर्य की उपासना और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है। माना जाता है कि सूर्य देव की आराधना से जीवन में ऊर्जा, स्वास्थ्य और समृद्धि आती है।aajtak.in
📅 छठ पूजा 2025 की तारीखें
छठ पूजा 2025 इस वर्ष 26 अक्टूबर से 29 अक्टूबर तक मनाई जाएगी। यह चार दिनों का त्योहार है, जिसमें हर दिन का अपना विशेष महत्व होता है:
- पहला दिन – नहाय खाय (26 अक्टूबर)
- दूसरा दिन – खरना (27 अक्टूबर)
- तीसरा दिन – संध्या अर्घ्य (28 अक्टूबर)
- चौथा दिन – उषा अर्घ्य (29 अक्टूबर
🙏 छठ पूजा का महत्व
छठ पूजा सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह आस्था, अनुशासन और पर्यावरण के प्रति समर्पण का संदेश देती है।
इस पूजा में व्रती (व्रत करने वाले व्यक्ति) पूरी निष्ठा से निर्जला उपवास रखते हैं और प्रकृति, जल, सूर्य और वायु को धन्यवाद देते हैं।
धार्मिक मान्यता के अनुसार, सूर्य देव से जीवन ऊर्जा प्राप्त होती है। उनकी उपासना से:
- मनुष्य का तन और मन शुद्ध होता है,
- रोगों से मुक्ति मिलती है,
- और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
🌄 छठ पूजा की कथा (Chhath Puja Vrat Katha)
छठ पूजा की कई पौराणिक कथाएँ हैं, जिनमें से सबसे प्रसिद्ध कथा रामायण और महाभारत दोनों से जुड़ी हुई है।
- रामायण कथा:
जब भगवान राम और माता सीता 14 वर्षों का वनवास पूरा कर अयोध्या लौटे, तब सीता माता ने कार्तिक शुक्ल षष्ठी के दिन सूर्य देव की पूजा की थी। उन्होंने सूर्य देव से आशीर्वाद माँगा कि उनका परिवार सदा सुखी रहे। तभी से यह परंपरा चली आ रही है। - महाभारत कथा:
दूसरी कथा के अनुसार, जब पांडवों ने सब कुछ खो दिया, तब द्रौपदी ने छठी माई की पूजा की और सूर्य देव से अपने परिवार के कल्याण की प्रार्थना की। सूर्य देव की कृपा से उन्हें फिर से समृद्धि प्राप्त हुई।
🌾 छठ पूजा की विधि (Chhath Puja Vidhi)
छठ पूजा की विधि अत्यंत पवित्र और अनुशासित मानी जाती है। आइए जानते हैं कि इसे कैसे मनाया जाता है:
1. नहाय खाय (पहला दिन)
इस दिन व्रती स्नान करके घर की सफाई करते हैं। इसके बाद चने की दाल, कद्दू की सब्जी और चावल का भोजन बनाकर ग्रहण किया जाता है। इस भोजन से पवित्रता और व्रत की शुरुआत होती है।
2. खरना (दूसरा दिन)
इस दिन पूरा दिन व्रत रखा जाता है और शाम को सूर्यास्त के बाद गुड़ और चावल से बने खीर (रसियाव) और रोटी का प्रसाद बनाकर सूर्य देव को अर्पित किया जाता है। व्रती इसके बाद ही प्रसाद ग्रहण करते हैं।
3. संध्या अर्घ्य (तीसरा दिन)
यह दिन सबसे महत्वपूर्ण होता है। व्रती नए कपड़े पहनते हैं और नदी या तालाब के किनारे जाकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। इस समय पूरा वातावरण “छठ मइया के गीतों” से गूंज उठता है।
4. उषा अर्घ्य (चौथा दिन)
अंतिम दिन सूर्योदय से पहले नदी या जलाशय के किनारे व्रती खड़े होकर उगते सूर्य को अर्घ्य देते हैं। इसके बाद परिवार और समाज की सुख-शांति की कामना की जाती है।
अर्घ्य देने के बाद व्रती प्रसाद ग्रहण करते हैं और व्रत का समापन होता है।
🌼 छठ पूजा में उपयोग की जाने वाली सामग्री
छठ पूजा में प्रयुक्त सामग्रियाँ सभी प्राकृतिक और शुद्ध होती हैं, जैसे:
- ठेकुआ (मुख्य प्रसाद)
- गन्ना, नारियल, केला, सुथनी
- कच्चा दूध, शहद, चावल
- दीपक और मिट्टी के कलश
- बांस की टोकरी और सूप
ये सभी चीजें प्रकृति से जुड़ाव और शुद्धता का प्रतीक हैं।
🎶 छठ पूजा के गीतों का महत्व
छठ पूजा में लोकगीतों का विशेष स्थान है। महिलाएँ पारंपरिक गीत गाती हैं जैसे –
“केलवा के पात पर, उगेलन सूरज देव…”
“छठी मइया तोहार महिमा अपार…”
इन गीतों से वातावरण भक्ति और आनंद से भर जाता है।
🕊️ छठ पूजा का वैज्ञानिक पहलू
छठ पूजा केवल धार्मिक नहीं बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है।
सूर्य की किरणें शरीर में विटामिन D प्रदान करती हैं और जल के माध्यम से सूर्य को अर्घ्य देने से शरीर में ऊर्जा संतुलन बना रहता है।
यह व्रत शरीर को डिटॉक्स करने और मन को शांत रखने में मदद करता है।
🌞 निष्कर्ष
छठ पूजा 2025 केवल पूजा नहीं, बल्कि आस्था, अनुशासन और प्रकृति के प्रति प्रेम की भावना का प्रतीक है।
इस दिन जब डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है, तो लगता है मानो पूरी धरती भक्ति से झिलमिला उठी हो।
🌸 “जय छठी मइया! सुख-समृद्धि और शांति सबके जीवन में बनी रहे।” 🌸
