Tazatimeslive NEWS

“बिहार में RJD की हार क्यों हुई? — 2024-25 का विश्लेषण और वजहें”…

bihar election

ब्लॉग: बिहार में RJD को इतने कम वोट क्यों मिले हैं

बिहार की राजनीति में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) हमेशा से एक प्रमुख खिलाड़ी रहा है। लेकिन हाल के चुनावों (लोकसभा और विधानसभा) में RJD को जितना वोटशेयर मिला, उम्मीद के मुताबिक सीटों में तब्दील नहीं हो पाया। आइए इस ब्लॉग में हम गहराई से देखें कि इसकी सबसे बड़ी वजहें क्या हैं।


1. वोट शेयर में बढ़ोतरी, लेकिन सीटों में कमी

लोकसभा चुनाव 2024 में RJD ने बिहार में लगभग 22.14% वोट शेयर हासिल किया। Live Hindustan+2Live Hindustan+2
यह वोट प्रतिशत पिछले कुछ चुनावों में एक बढ़त दिखाता है, लेकिन सीटों में यह बढ़त नहीं दिख पाई — उदाहरण के लिए, AajTak के मुताबिक RJD को सिर्फ 4 सीटों पर जीत मिली थी। AajTak
यानी वोट तो आए, लेकिन यह वोटिंग पर्सेंटेज सीट जीतने में कम असरदार साबित हुआ।


2. सीट फैलाव और कमजोर अस्थिरता

RJD की हार का एक बड़ा कारण सीट मैनेजमेंट और क्षेत्रीय फैलाव भी है। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि ऐसी कई विधानसभा सीटें हैं, जहां RJD पहले बहुत करीब से जीती थी, लेकिन मार्जिन बहुत कम था। Khabargaon
मतलब ये कि उनका वोट बैंक कहीं-कहीं मजबूत है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है कि हर सीट पर जीत सुनिश्चित हो सके।


3. मुस्लिम वोट बैंक में दरार

RJD का एक पारंपरिक वोट बैंक है मुस्लिम समुदाय। लेकिन हाल के समय में इस वोट बैंक पर उनकी पकड़ कमज़ोर होती दिख रही है। कुछ रिपोर्ट्स में यह कहा गया है कि सीमांचल जैसे मुस्लिम बहुल इलाकों में मुस्लिम मतदाताओं का झुकाव RJD से हट कर अन्य दलों की ओर बढ़ता दिख रहा है। The Times of India+1
इसका मतलब है कि RJD को अब पहले जितनी कट्टर समर्थन नहीं मिल रहा हो सकता — और यह उनकी सीटों की संख्या को प्रभावित करता है।


4. जातीय राजनीति का असर और ऊपरी जातियों की दूरी

राजनीतिक विश्लेषण बताते हैं कि RJD का समर्थन मुख्य रूप से यादव और कुछ पिछड़े वर्गों में मजबूत है, लेकिन ऊपरी जातियों (upper castes) में उनका वोट शेयर बहुत कम रहा है। P Gurus
यह जातीय विभाजन Bihar में चुनावी राजनीति की जड़ है और इसने RJD के लिए सीमाएँ तय कर दी हैं — खासकर उन इलाकों में जहाँ ऊपरी जातियों की आबादी अधिक है।


5. पुरानी छवि और “जंगल राज” की यादें

लालू यादव और RJD का इतिहास — विशेष रूप से “जंगल राज” की अवधि — अभी भी कई मतदाताओं के ज़ेहन में है। कुछ लोग RJD को भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था से जोड़कर देखते हैं। इस पुरानी छवि की वजह से नया वोट बैंक बनाना या पुराने मतदाताओं को भरोसे में रखना मुश्किल हो सकता है।
इस तरह की धारणा RJD के विकास-उन्मुख या आधुनिक छवि बनाने की कोशिशों को कमजोर कर देती है।


6. स्थानीय नेतृत्व और जनप्रतिनिधि मुद्दे

कुछ सीटों पर RJD का स्थानीय संगठन कमजोर हो सकता है। अगर पार्टी का स्थानीय स्तर पर मजबूत कैंपेन नहीं है या उम्मीदवारों का जनसमर्थन कम है, तो वोट “स्क्रैप वोट” में या दूसरे दलों में बंट सकते हैं।
इसके अलावा, उपचुनाव (by-elections) में RJD को हार का सामना करना पड़ा है, जिससे उनकी जमीनी ताकत पर सवाल उठते हैं। Navbharat Times


7. रणनीति और गठबंधन की चुनौतियाँ

RJD महागठबंधन (इंडिया ब्लॉक) का हिस्सा है, लेकिन गठबंधन की रणनीति और सीट वितरण की समस्याएँ भी उनकी हार की एक वजह हो सकती हैं।
कुछ विश्लेषकों के अनुसार, गठबंधन पार्टनर्स के साथ समझौते और सीट शेयरिंग ने RJD को अपनी ताकत पूरी तरह दिखाने से रोका। AajTak
इसके अलावा, गठबंधन में अन्य दलों के दावे और महत्वाकांक्षाएँ पार्टी को जुवा जैसी स्थिति में ला सकती हैं, जहाँ RJD को हर सीट पर अपना दबदबा नहीं बनाना पड़ता।


8. वोटर टर्नआउट और सियासी माहौल

वोटिंग प्रतिशत (voter turnout) और चुनावी माहौल भी RJD की नतीजों को प्रभावित करते हैं। अधिक मतदान, नए मतदाता, और युवाओं की भागीदारी यह तय करती है कि कौन-सा दल फायदा उठाता है।
अगर युवा और नए मतदाता ज्यादा एनडीए की ओर झुकते हैं, तो RJD के पुराने वोट बैंक पर दबाव बढ़ जाता है।
(हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स में बताया गया है कि मतदान बढ़ने पर भी RJD को अपेक्षित लाभ नहीं मिला है।) Reddit+1


9. नेतृत्व संबंधी आलोचनाएँ और स्कैंडल्स

RJD के कुछ नेताओं द्वारा पुरानी बयानबाज़ियाँ और विवादित बयान भी मतदाताओं को नाराज़ कर सकते हैं। उदाहरण के तौर पर, Times of India की खबर में एक RJD विधायक पर “ऊपरी जातियों” के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप है। The Times of India
ऐसे मामले न सिर्फ पार्टी की छवि को नुकसान पहुँचाते हैं, बल्कि उन्हें “वोटर ट्रस्ट” बनाने में भी बाधा देते हैं।


10. विकास और लोक नीतियों में पिछड़ापन

आज के मतदाता सिर्फ पहचान-राजनीति (जाति-पिछड़ा) की राजनीति पर भरोसा नहीं करते हैं। उन्हें विकासअर्थव्यवस्थानौकरीइन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे मुद्दे भी चाहिए।
अगर RJD यह दिखाने में नाकाम रही कि वे इन आधुनिक और विकास-उन्मुख मुद्दों पर काम कर सकते हैं, तो यह मतदाताओं का भरोसा खोने की बड़ी वजह हो सकती है।
कई विश्लेषकों का कहना है कि RJD को “पुराने युग की” पार्टी समझा जाने लगा है, जो वर्तमान युग की अपेक्षाओं से पूरी तरह मेल नहीं खाती।


निष्कर्ष

बिहार में RJD को कम वोट मिलने की समस्या एक-तरफा कारण से नहीं, बल्कि कई कारकों का मिला-जुला असर है:

  • वोट शेयर बढ़ा है, लेकिन सीटों में तब्दील नहीं हुआ
  • मुस्लिम और यादव वोट बैंक में दरार
  • ऊपरी जातियों में कमजोर पकड़
  • पुरानी “जंगल राज” की छवि
  • गठबंधन रणनीति और सीट शेयरिंग की चुनौतियाँ
  • नेतृत्व और विवादों की वजह से भरोसे में कमी
  • विकास-मुखी मुद्दों पर अपेक्षित पकड़ का न होना

अगर RJD भविष्य में फिर से ताकतवर बनना चाहती है, तो उन्हें सिर्फ पहचान राजनीति (जाति-पिछड़ा) पर निर्भर रहना नहीं चाहिए। उन्हें विकास-उन्मुख एजेंडामजबूत स्थानीय संगठन, और युवा मतदाताओं को लुभाने की रणनीति अपनानी होगी।

go to home page:tazatimeslive.in

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Index