Site icon TazaTimeslive

‘गणपति बप्पा मोरिया’: बहुत से लोगो को नहीं पता होगा कि 1893 को क्या हुआ था और गणेशोत्सव की शुरुआत कैसे हुई थी ?…

गणेश उत्सव बड़े ही धूमधाम से पूरे देशभर में मनाया जाता है. इस रिपोर्ट में हम आपको बताते हैं कैसे देश में गणेश उत्सव की शुरुआत हुई और इसकी शुरुआत होने से कितनी लड़ाइयां लड़ी गई।

गणेश उत्सव की शुरुआत :गणपति बप्पा देश कोने-कोने में विराजने वाले है. गणेशोत्सव मानाने के लिए तैयारियां जोरो जोरो से चल रही है। लेकिन कभी अपने सोचा कि शुरुआत कहा से हुई ,कैसे त्योहार देश में धूमधाम से मनाया जाने लगा। देश में आजादी की लौ जाने की शुरू से ये पर्व आज भारत के लगभग हर राज्य में मनाया जाता है

😂😂

महाराष्ट्र में गणेश उत्सव की शुरुआत

स्वतंत्रता संग्राम सेनानी महादेव प्रसाद पाण्डेय बताते हैं, गणेश उत्सव की शुरुआत महाराष्ट्र में हुई इसके बाद धीरे-धीरे ये पूरे देश में मनाया जाने लगा. गणेशोत्सव के माध्यम से देश में आजादी के आंदोलन को बढ़ाने का और जागरूकता बढ़ाने का काम हुआ. वही बाद में भी गणेश समितियों के द्वारा कई तरह के सामाजिक कार्य संपन्न हुए.

जिसमे कमल नारायण शर्मा, द्वारिका प्रसाद मिश्रा ,पंडित रविशंकर शुक्ल, पंडित सुंदरलाल शर्मा, सुधीर मुखर्जी उस समय के बड़े नेता अलग अलग पक्ष वाले आपस में जोर शोर से एक विषय पर आपस में वाद विवाद होता था.

1938 में गणपति बप्पा का बजट

महाराष्ट्र के रिकॉर्ड के अनुसार गणपति को लेकर कमेटी बनाई गई थी, जिसमें सन 1938 में समिति द्वारा गणपति का बजट 100 रुपए का बनाया गया था. जिमसें प्राण प्रतिष्ठा और मूर्ति के लिए 10 रुपए, कार्यक्रम के लिए 50 रुपए, विसर्जन के लिए 25 रुपए और प्रसाद अन्य खर्च के लिए 15 रुपए.

अब गणेश उत्सव का आकार और भव्यता लगातार बढ़ती जा रही है. जहां आजादी के पहले 100 रुपए के बजट में शहर का सबसे बड़ा गणेश उत्सव संपन्न हो जाता था. वहीं अब यह बजट 10 लाख को भी पार कर गया है.

Exit mobile version